मंडी : मंडी के संस्कृति सदन में 3 जुलाई से 5 जुलाई तक आयोजित होने वाले तीन दिवसीय ‘देव भूमि इंटरनेशनल फिल्म फेस्टीवल’ का शुक्रवार को भव्य शुभारंभ हुआ। इस प्रतिष्ठित महोत्सव का उद्घाटन खाद्य एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अध्यक्ष तथा भारत सरकार के पूर्व कृषि एवं पशु पालन सचिव तरूण श्रीधर ने दीप प्रज्जवलित करके किया।
इस गौरवमयी अवसर पर मुख्य अतिथि तरूण श्रीधर ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि फिल्में चाहे अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय या फिर राज्य स्तर पर बनाई गई हों, वे हमेशा समाज के दर्पण के रूप में कार्य करती हैं और कलाकारों को अपनी अभिव्यक्ति का एक सशक्त मंच प्रदान करती हैं।
महोत्सव के पहले दिन प्रदर्शित की गईं विभिन्न लघु फिल्मों और वृत-चित्रों का बारीकी से अवलोकन करने के बाद उन्होंने उनकी मुक्तकंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इन फिल्मों के माध्यम से आम आदमी की रोजमर्रा की पीड़ा, गंभीर चुनौतियों और बुनियादी समस्याओं को बहुत ही बखूबी और संवेदनशीलता के साथ परदे पर दर्शाया गया है। इसके साथ ही उन्होंने राज्य के स्थानीय कलाकारों और फिल्म जगत से जुड़े तमाम प्रबुद्ध व्यक्तियों से एक विशेष अपील की।
उन्होंने कहा कि फिल्मों में पहाड़ को केवल एक खूबसूरत पृष्ठभूमि या लोकेशन के तौर पर प्रयोग करना बेहद आसान है, लेकिन पहाड़ के वास्तविक और कठिन जन-जीवन की असली समस्याओं को गहराई से समझना एक बिलकुल अलग बात है। उन्होंने सभी निर्देशकों और कलाकारों का आह्वान किया कि वे पहाड़ों की विषम चुनौतियों, वहां की जीवंत लोक कलाओं, पारंपरिक मान्यताओं, देव-संस्कृति तथा समृद्ध ऐतिहासिक संस्कृति से जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं को सिनेमा के परदे पर प्रमुखता से लाएं, ताकि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी लोग पहाड़ की इस वास्तविक पृष्ठभूमि और सांस्कृतिक विरासत से अच्छी तरह परिचित हो सकें। उन्होंने फिल्म फेस्टिवल के निदेशक पवन शर्मा के भगीरथ प्रयासों की जमकर सराहना की,
जिन्होंने हिंदी सिनेमा का ध्यान देश के सुदूर पहाड़ों और गांवों की तरफ आकर्षित किया है। श्रीधर ने रेखांकित किया कि पवन शर्मा ने अब तक जितनी भी फिल्में बनाई हैं, उनकी कहानी और शूटिंग पूरी तरह से हिमाचल प्रदेश की धरती पर ही आधारित रही है, और उनके प्रयासों के चलते ही आज जंजैहली की खूबसूरत वादियों को हिंदी सिनेमा की पहली पसंद के रूप में पहचान मिली है। इसके साथ ही उन्होंने स्थानीय प्रतिभाओं को एक बड़ा मंच प्रदान कर उनके सपनों को नई उड़ान दी है।
इस गरिमामयी समारोह में जल प्रबंधन बोर्ड के उपाध्यक्ष शशी शर्मा, प्रसिद्ध समाजसेवी राजा सिंह मल्होत्रा और एस जे वी एन एल के वरिष्ठ मुख्य जनरल मैनेजर अरुण धीमान विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस दौरान बॉलीवुड के प्रख्यात अभिनेता संजय मिश्रा, आदित्य श्रीवास्तव, हेमंत पांडे और राजेश जैश ने भी अपने विचार साझा किए और हिमाचल के सीधे-सादे लोगों, यहां के मनोरम परिवेश और समृद्ध संस्कृति की जमकर तारीफ की। कार्यक्रम की शुरुआत में फेस्टिवल डायरेक्टर पवन शर्मा ने मुख्य अतिथि और अन्य गणमान्य व्यक्तियों का गर्मजोशी से स्वागत किया। महोत्सव में कला और समाज के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित किया गया, जिसमें छायाकार बीरबल शर्मा को लाईफ टाइम सम्मान, मुरारी शर्मा को देवभूमि साहित्य सम्मान, शुक्ला शर्मा को संगीत के लिए देवभूमि लाईफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड, गंगा राम राजी को साहित्य के क्षेत्र में देवभूमि लाईफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड, रेवती सैनी को देव-भूमि महिला सशक्ति सम्मान, उमेश भारद्वाज को देव भूमि संगीत पुरस्कार और नंद लाल चंदेल को वास्तुकला क्षेत्र में बेहतरीन योगदान के लिए सम्मानित किया गया। शुभारंभ के मौके पर दर्शकों के लिए दो मुख्य फिल्में ‘गुलेर के फूल’ और ‘बर्थडे केक’ दिखाई गईं, जिन्हें भारी जनसमर्थन और सराहना मिली। इसके अलावा पहले दिन कई अन्य उत्कृष्ट लघु फिल्में भी प्रदर्शित की गईं, जिन्हें देखने के लिए स्थानीय लोगों और सिनेमा प्रेमियों में भारी उत्साह और उत्सुकता देखी गई।
