मंडी -प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन की बैठक रविवार को मंडी में जिला अध्यक्ष केपी शर्मा की अध्यक्षता में हुई। बैठक में जिले के विभिन्न निजी स्कूलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और शिक्षा विभाग की नीतियोंको लेकर गंभीर चिंताएं व्यक्त कीं। बैठक में प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के प्रांत अध्यक्ष जगजीत सिंह ठाकुर ने कहा कि बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले निजी स्कूलों के छात्रों को लैपटॉप न देना, जबकि सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को यह सुविधा प्रदान करना, निजी विद्यालयों के साथ शिक्षा विभाग का सौतेला व्यवहार दर्शाता है।
एसोसिएशन ने इस निर्णय को शिक्षा के क्षेत्र में भेदभावपूर्ण करार देते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने कहा कि स्विफ्ट प्रणाली के माध्यम से ऑनलाइन हाजिरी अनिवार्य किए जाना न्यायोचित नहीं है। इस प्रणाली से निजी स्कूलों पर अनावश्यक प्रशासनिक दबाव बढ़ रहा है और जमीनी स्तर पर कई तकनीकी समस्याएं सामने आ रही हैं, जिन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है। निजी स्कूल भी शिक्षा के क्षेत्र में सरकार के महत्वपूर्ण भागीदार हैं और प्रदेश में लाखों छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहे हैं। इसके बावजूद निजी विद्यालयों को बार-बार उपेक्षा और असमानता का सामना करना पड़ रहा है,
जो दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि
बोर्ड परीक्षाओं में मेरिट हासिल करने वाले निजी स्कूलों के छात्रों को भी लैपटॉप दिए जाएं। निजी और सरकारी स्कूलों के बीच समान नीति लागू की जाए तथा ऑनलाइन हाजिरी प्रणाली से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए। उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान यह भी निर्णय लिया गया कि यदि निजी स्कूलों की मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया गया, तो एसोसिएशन आने वाले समय में सामूहिक रूप से आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होगी। उन्होंने कहा कि निजी स्कूल अपने स्तर पर तीसरी पांचवी और आठवीं की परीक्षाएं अपने स्कूल में आयोजित करेंगे और उसके बाद इन्हें बीईपीओ से सत्यापित करवाया जाएगा। शिक्षा विभाग की कार्य प्रणाली पर आपत्ति जताते हुए उन्होंने कहा की मात्रा तृतीय कक्षा में पढ़ने वाले छात्र के लिए पर्यवेक्ष नियुक्त करना समझ से पड़े हैं। हिमाचल प्रदेश के निजी शिक्षण संस्थानों की बदौलत शिक्षा का स्तर सुधरा है । शिक्षा स्तर 25 से पांचवें नंबर पर हिमाचल का आना निजी शिक्षण संस्थाओं का योगदान है जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता। नेट और जीईई जैसी परीक्षाओं में निजी स्कूलों के विद्यार्थी पास होकर डॉक्टर, इंजीनियर और वैज्ञानिक बन रहे हैं । उन्होंने उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के आभार जताते हुए कहा कि उनके समक्ष स्कूल बसों की समस्याओं के बारे में मांग रखी थी जो उन्होंने पूरी कर दी है । उन्होंने यह भी मांग की है कि जो सरकार द्वारा 15 साल का समय अवधी वाहनो के लिए सुनिश्चित की है, निजी स्कूल के वाहनों को यहां समय अवधि 15 से 20 वर्ष की जाए। इस अवसर पर प्रदेश महासचिव राजेश ठाकुर, प्रदेश सचिव पवन शर्मा, पूर्व महासचिव जीएस मित्तल, जिला अध्यक्ष केपी शर्मा, विक्रम ठाकुर हेमराज ठाकुर, नवीन सहित अन्य निजी शिक्षण संस्थानों के पदाधिकारी भी उपस्थित थे।
