मंडी- प्रखर पत्रकार,शिक्षाविद, साहित्यएवं कला मर्मज्ञ दिवंगत हेमकांत कात्यायन की स्मृति में हेमकांत मेमोरियल ट्रस्ट मंडी की ओर से पत्रकारिता , साहित्य, संगीत-कला के क्षेत्र में ख्याति प्राप्त विभूतियों को सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान स्व. हेमकांत कात्यायन के 83वें जन्म-जयंती वर्ष के अवसर पर 25 दिसंबर को आयोजित होने वाले आदरांजलि 2025 समारोह के दौरान प्रदान किया जाएगा।
स्व. हेमकांत कात्यायन के पुत्र एवं समारोह के संयोजक सिद्धार्थ कात्यायन ने बताया कि ट्रस्ट की अध्यक्ष निर्मला कात्यायन की अध्यक्षता में पुरस्कार चयन समिति की ओर से इस वर्ष हेमकांत कात्यायन स्मृति पत्रकारिता प्रेरणा पुरस्कार हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ पत्रकार पंडित कृष्ण भानु को प्रदान किया जा रहा है। जबकि साहित्य सेवा पुरस्कार इस बार वरिष्ठ एवं व्योवृद्ध साहित्यकार कृष्ण कुमार नूतन को दिया जा रहा है। वहीं संगीत कला पुरस्कार स्व. पियूष स्वामी को मरणोंपरांत तथा उनके शिष्य एवं संगीत सदन के वर्तमान संचालक उमेश भारद्वाज को दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पत्रकारिता प्रेरणा पुरस्कार प्राप्त करने वाले पंडित कृष्ण भानु हिमाचल की पत्रकारिता के सशक्त हस्ताक्षर रहे हैं। बैहना और मंडी शहर में पत्रकारिता की शुरूआत करने वाले जुझारू पत्रकार ने संघर्ष की पगडंडियों से गुजरते हुए शिखर पर अपना परचम लहराया है।
हिंदी दैनिक समाचार पत्र वीरप्रताप में राज्य प्रमुख के रूप में कार्य करने वाले कृष्ण भानु मंडी जिला के पहले ऐसे पत्रकार रहे हैं, जिन्होंने प्रदेश की राजधानी शिमला में पत्रकारिता का नया अध्याय शुरू किया। इसके अलावा राष्ट्रीय सहारा, दैनिक भास्कर, अमर उजाला, अजीत समाचार जैसे राष्ट्रीय समाचार पत्रों में अपनी लेखनी से आपने विशिष्ट छाप छोड़ी। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भी दखल रहा। वे हरियाणा विधानसभा प्रेस गैलरी कमेटी के उपाध्यक्ष, हिमाचल प्रदेश विधानसभा प्रेस गैलरी के अध्यक्ष, लगातार छह बार शिमला प्रेस क्लब के प्रधान और तीन बार मुख्य महासचिव, स्टेट जुविनाइल जस्टिस बोर्ड के सदस्य, हिमाचल पत्रकार महासंघ के उपाध्यक्ष और हिमाचल पत्रकार संसद के मुख्य संरक्षक रहे। गत 25 वर्षों से शिमला जर्नलिस्ट्स एचबी को-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटिड के अध्यक्ष पद पर आसीन हैं। उसी प्रकार हिंदी फिल्म गीत गाया पत्थरों ने से मशहूर हुए कृष्ण कुमार नूतन ने कुछ समय मायानगरी में भी गुजारा,जहां पर गुरूदत्त, बलराज साहनी, रामानंद सागर ,गीतकार गुलजार आदि महान हस्तियों के साथ कार्य करने का मौका मिला। उन्हें भाषा एवं संस्कृति विभाग की ओर से उनकी पुस्तक इतिहास साक्षी है पर गुलेरी पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। नूतन जी लंबे समय तक हिमाचल कला संस्कृति एवं भाषा अकादमी के सदस्य रहे हैं। उन्होंने हिंदी कहानी, कविता और उपन्यास की करीब बीस पुस्तकें लिखी हैं। उसी प्रकार 26 अप्रैल, 1941 को मंडी नगर में जन्में पियूष स्वामी ने प्रयाग संगीत समिति, इलाहाबाद से एम.ए. संगीत की शिक्षा प्राप्त करने के बाद में जिला उपायुक्त, मंडी के कार्यालय में नौकरी करते हुए सुपरिटैन्डैंट के पद से सेवानिवृत हुए। उन्होंने मंडी नगर में विधिवत संगीत प्रशिक्षण के लिए संगीत सदन की नींव रखी। संगीत का प्रशिक्षण लिए हुए इनके कई शिष्य आज देश-विदेश में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। स्वामी जी संगीत के मर्मज्ञ थे वे सभी वाद्य यंत्र बड़ी कुशलता से बजाते और सिखाते थे,खासकर ध्रुपद धमार गायकी के विशेषज्ञ रहे हैं। उनके देहावसान के पश्चात इस संस्थान के संचालन का उत्तरदायित्व उनके ही गुणी शिष्य श्री उमेश भारद्वाज को सौंप दिया। पिछले 46 वर्षों से यह सदन गायन-वादन-नृत्य के क्षेत्र में उत्कृष्ट शिक्षा संगीत जिज्ञासुओं को देता आ रहा है। उमेश भारद्वाज संगीत प्रशिक्षण में एक स्थापित नाम हैं। गायन में स्नातकोत्तर, सितार और तबला में स्नातक की उपाधि प्राप्त उमेश का जीवन शुरू से ही संगीत साधना को समर्पित रहा है। घर में संगीत के माहौल था उमेश के पिता जी गज़ल व कव्वाली गायन से जुड़े थे। तबला वादन के लिए उनसे ही प्रोत्साहन मिला। अस्सी के दशक में संगीत सदन, मंडी में पियूष स्वामी जी के शिष्य के रूप में ने दीक्षा आरंभ की थी। इन्होंने वर्ष 1999 से गुरुजी के सहायक के रूप में काम शुरू किया। अपने गुरू की सीख कि उस्ताद बनके नहीं बल्कि विद्यार्थी बन कर सबको सीखाना, का पालन अभी तक करते आ रहे हैं। संगीत क्षेत्र में मंडी की प्रतिभाओं को एक नई पहचान दिलाने में आपके प्रयास सदैव सराहनीय रहे हैं। इन सद्प्रयासों के लिए उमेश शर्मा एवं संगीत सदन, मंडी को उत्कृष्ट कला पुरस्कार से अलंकृत से अलंकृत किया जा रहा ह
