मंडी-मेडिकल कॉलेज नेरचौक में गंदगी का आलम,अधिकारियों का बोलबाला,सरकार ने आरकेएस का गठन तो किया,परन्तु तीन साल बीत जाने तक भी नहीं हो सका एक भी मीटिंग का आयोजन
मंडी-नेरचौक स्थित श्री लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में गंदगी का आलम चरम सीमा पर है। चिकित्सा उपचार,और स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ प्राप्त करने वाले दूरदराज क्षेत्रों से आने वाले मरीज खासा परेशानियों का सामना कर रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के नए भवन के अधिकतर टॉयलेट्स और पार्किंग में गंदगी के ढेरों पर भिनभिनाती मक्खियां किसी बड़े संक्रमण को न्योता देती प्रतीत होती है।
दारू,बीयर की बोतले,कांच के टुकड़े,प्लास्टिक प्लेट्स, डिस्पोजल गिलास इत्यादि मानवीय अपशिष्ट पदार्थों की सड़ांध और गंदगी से भरे पड़े हैं। स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए आने वाले मरीजों के तीमारदारों में गौरव,रिंकू,सचिन,नीलम,अनु, प्रिया, पुरुषोत्तम, केवल कृष्ण, सुभाष, मेहर चंद इत्यादि दो दर्जन से अधिक तीमारदारों ने बताया कि,यह हॉस्पिटल दूर दराज के क्षेत्रों से आने वाले स्वास्थ्य लाभार्थियों के लिए एक केंद्र बिंदु होने के साथ साथ किसी वरदान से कम नहीं है। वहीं दूसरी ओर परिसर में फैली गंदगी से उत्पन्न बदबू किसी नरक से कम नहीं है। एक तीमारदार अंकुश ने बताया कि,वह कुल्लू के बंजार के रहने वाले है। कुल्लू हॉस्पिटल में डॉक्टर की लापरवाही से पिछले दिनों जहां एक प्रसूता को काल का ग्रास बनना पड़ा था। इसी कारण अब कुल्लू से अधिकतर परिजन प्रसुताओं की सफल डिलीवरी करवाने के लिए बड़ी तादाद में नेरचौक पहुंच रहे है। प्रसुताओं में मनाली के रायसेन,आनी,चुआई,जलोड़ी जोत,बंजार घाटी,तीर्थन घाटी से प्रसूताएं आ रही है। इसके अलावा सर्जरी,शिशु रोग,हड्डी रोग इत्यादि विभिन्न बीमारियों से निजात पाने के लिए एवम् अच्छी स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ प्राप्ति के लिए आने वाले मरीजों के साथ दिमारदारों को कई कई सप्ताह मरीज के साथ रहना पड़ता है। गंदगी के कारण इन जगहों पर शुद्ध आवोहवा तो दूर अस्वस्थ और गंदी दुर्गंध युक्त हवा के बीच अपने मरीजों को लाभ पहुंचाने की बजाय खुद बीमार हो रहे हैं। मेडिकल कॉलेज के भूतल पर स्थित ब्लड बैंक,शव विच्छेदन हाल और पार्किंग व्यवस्था अंधेरे और रिसाव,सीलन भरे हुए गंदगी युक्त पानी की वजह से किसी जुए के अड्डे और नशेड़ियों के अड्डे से कम नहीं है। पार्किंग में महिला चालकों के लिए दिनदहाड़े गाड़ी पार्क करना किसी खतरे से खाली नहीं है। इन जगहों पर प्रकाश की उचित व्यवस्था और सीसीटीवी कैमरे की पहुंच से दूर न होने के कारण गुफा नुमा अंधेरे के कारण महिला सुरक्षा पर भी सवाल है। जबकि पिछले दिनों इसी हॉस्पिटल में गंदगी के ऊपर मीडिया में खबरें सुर्खियों में रही है। यही नहीं मेडिकल वार्ड की हालत देखते ही बनती है।शौचालयों में चार वॉशवेशन लगे हुए है परन्तु उनमें केवल एक विश्वेषण में पानी आ रहा है परन्तु उसमें भी नल टूटा हुआ है वहीं दूसरी ओर हर वार्ड में कर्टन रोड के साथ पर्दे लगे हुए थे परन्तु इस समय हालत यह है कि वार्ड के कमरे में मात्र एक ही पर्दा लटका हुआ दिखाई देता है।जिसके चलते मरीजों को कपड़े बदलने या पट्टी करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।गौरतलब रहे कि इस समस्या को लेकर गत दिनों जब मुख्यमंत्री नेरचौक मेडिकल कॉलेज रोबोट सर्जरी के उदघाटन पर आय थे तो पत्रकारों ने पूछा था कि सरकार का तीन साल का कार्यकाल हो चुका है।सरकार ने इस मेडिकल कॉलेज में आरकेएस का गठन तो कर रखा है परन्तु आज दिन तक आरकेएस की बैठक आयोजित नहीं हो सकी है। जिसमें मुख्यमंत्री ने कहा था कि शीघ्र ही बैठक आयोजित करवाई जाएगी,मगर आज दिन तक नहीं हो सकी।मीटिंग न होने का कारण अराजकता का माहौल पनप रहा है।बैठक न होना स्वास्थ्य मंत्री की कुंभकर्णी नींद है।