मंडी-30 जून की रात को मंडी जिला के सिराज विधानसभा क्षेत्र में बादल फटने से भारी तबाही हुई
जिसमें कई लोग अपनी जान गवा बैठे और कई अभी भी लापता है जिन्हें प्रशासन और परिवार वाले अभी भी तलाश कर रहे हैं इसी कड़ी में मंडी जिला के थुनाग बागवानी और बानीकी कॉलेज के 150 से अधिक छात्र थुनाग में फंसे हुए थे । जिन्होंने बड़ी मुश्किल से इधर-उधर भाग कर अपनी जान बचाई ।बाढ़ के पानी में दुबे अपने अध्यापिका के परिवार को बचाया।इन्हीं 150 छात्रों में से दो छात्र साहिल ठाकुर जो मंडी जिला के सरकाघाट क्षेत्र के काश गांव से संबंध रखता है और रोनिड जो जिला सिरमौर का निवासी है। इस त्रासदी के प्रत्यक्षदर्शी छात्र साहिल ने बताया की 30 जून की रात हम खाना खाने के बाद सोने की तैयारी में थे तभी मकान मालिक ने उन्हें सूचना दी कि कहीं दूर डेजी गांव में थुनाग से 8 किलोमीटर पहले बादल फटा है और भारी मात्रा में मलवा और पानी थुनाग क्षेत्र की तरफ आ रहा है तो सबसे पहले उन्होंने अपने कॉलेज के छात्रों को और हॉस्टल में रह रही छात्रों को फोन से सूचित किया के तुरंत सुरक्षित स्थानों में भाग जाओ उन्होंने कहा कि देखते-देखते ही पूरा थुनाग क्षेत्र का बाजार पानी से लबालब भर गया और वह भी सुरक्षित उनकी बिल्डिंग के छत पर चढ़ गए तो उन्होंने देखा कि कई लोग मोबाइल के सहारे फ्लैशलाइट जलाकर मदद मांग रहे थे तो साहिल और रोनित ने तुरंत जाकर तीन-चार लोगों को जो पानी में डूब चुके थे सुरक्षित बाहर निकाल और उसके बाद उन्होंने देखा की कोर्ट के भवन में मोबाइल की रोशनी जगमगा रही थी जिसमें उन्हीं के कॉलेज की अध्यापिका कल्पना ठाकुर उसका पति और उसका छोटा सा बच्चा पूरी तरह से पानी में फंस चुके थे और गर्दन तक पानी में डूबने लगा गए थे और उन्होंने अपने नन्हें बच्चों को हाथों पर ऊपर उठा कर रखा था तभी साहिल और रोनित अपनी जान की परवाह न करते हुए पानी में उन्हें बचाने दौड़ पड़े और बड़ी मुश्किल से उन तीनों को सुरक्षित पानी से बाहर निकाला ।
अपनी जान नहीं, सामने देखे चीख पुकार रहे लोगों की जान ज्यादा जरूरी
जब हमने सहित से पूछा कि आप लोगों को मौत से डर नहीं लगा जो आप भारी बहते पानी में जान बचाने को कूद पड़े तो उन्होंने बताया कि उसे समय हमें सिर्फ लोगों की जिंदगीया नजर आ रही थी जो पानी में डूब रहे थे। इसलिए हमने उनकी जान बचाने के लिए अपनी जान की परवाह नहीं की हम किसी को अपनी आंखों के सामने मारता हुआ नहीं देख सकते थे और भगवान ने उनके साथ दिया और वे उन्हें बचाने में कामयाब हुए । साहिल का कहना है कि जब पहले जून की सुबह हुई तो उन्हें पानी में बहते हुईदो तीन शव नजर आए और चारों तरफ तबाही का मंजर देखकर रोंगटे खड़े हो गए उन्होंने देखा कि पूरा का पूरा बाजार बिल्कुल तबाह हो चुका था कहीं एक भी दुकान और घर साबूत नहीं बचा था क्योंकि शहर के सभी भवनों की दो-दो मंजिलें पानी में डूब चुकी थी और ग्राउंड फ्लोर में रहने वाले क्षेत्र को पूरी तरह से तबाह हो गए थे ऐसा भयानक नजारा देखकर उन्हें भगवान का लाख शुक्र मनाया कि वह जिंदा बच गए
बच्चों ने कॉलेज को शिफ्ट करने की उठाई मांग,कहा परीक्षाए होने वाली है,नौनी विश्वविद्यालय में ही परीक्षा ली जाए क्योंकि बच्चे और परिजन अब थुनाग की तरफ देखना भी नहीं चाहते
थुनाग बागवानी और बनी की कॉलेज का हॉस्टल और भवन भी नीचे की मंजिल खोकली हो चुकी है और पानी के भाव से वहां नदी का रूप धारण कर लिया था और कॉलेज में जाने के लिए कोई रास्ता भी नहीं बचा है और सभी छात्रों का यह कहना है कि इस कॉलेज को यहां से शिफ्ट करके कहीं और बनाया जाए और अभी इन बच्चों के जो परीक्षाएं होनी है उसके लिए उन्हें नौनी विश्वविद्यालय में ही परीक्षा ली जाए क्योंकि बच्चे और परिजन अब थुनाग की तरफ देखना भी नहीं चाहते क्योंकि बड़ी मुश्किल से वह जान बचाकर यहां से निकले । साहिल का कहना है कि 3 दिन के बाद प्रशासन ने कांढा क्षेत्र तक गाड़ियां भेजी और वहां तक कॉलेज के 92 छात्र छात्राएं 14 किलोमीटर का सफर तय करके गाड़ियों तक पहुंचे । और कुछ बच्चे तो पहले ही पैदल अपने-अपने घरों का रुख कर चुके थे।
