मंडी-अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद प्रदेश सह मंत्री जहान्वी चौहान ने अपना बयान जारी करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ बढ़ते अपराध आज एक गंभीर और चिंताजनक स्थिति बन चुके हैं।* पिछले वर्षों के आंकड़े स्पष्ट दर्शाते हैं कि प्रदेश में अपराधों का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है—वर्ष 2022 से 2025 तक मामलों में निरंतर वृद्धि हुई है और 2025 में यह आंकड़ा 1800 से अधिक पहुंच गया। दुष्कर्म, अपहरण और छेड़छाड़ जैसे मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, जबकि 2026 के शुरुआती महीनों में ही 300से अधिक मामले सामने आ चुके हैं। यह स्थिति कानून व्यवस्था की कमजोरी को उजागर करती है।
प्रदेश के विभिन्न जिलों से सामने आई घटनाएं इस भयावह स्थिति को और गहरा करती हैं—कांगड़ा के देहरा में स्कूल परिसर में मिड-डे-मील वर्कर की निर्मम हत्या, हमीरपुर के भोटा में वृद्ध महिला के साथ दुष्कर्म, सोलन के कुनिहार में शिक्षक द्वारा छात्राओं से अश्लील हरकतें, और ऊना में शादी से एक दिन पहले युवती की हत्या जैसी घटनाएं समाज को झकझोर देने वाली हैं।हाल ही की घटनाओं ने प्रदेश को और अधिक आक्रोशित किया है।सरकाघाट क्षेत्र में हुआ सिया हत्याकांड प्रदेश के लिए एक काला अध्याय बन चुका है, जिसने हर नागरिक को अंदर तक झकझोर दिया है और यह दर्शाया है कि कानून व्यवस्था कितनी कमजोर हो चुकी है।
इसके बाद मंडी में सामने आया वह मामला, जिसमें एक दुकानदार ने लड़की को फोन देने का झांसा देकर उसे होटल के कमरे में ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया—यह घटना अपराधियों के बढ़ते हौसले और सुनियोजित अपराध की मानसिकता को दर्शाती है।
वहीं मंडी शहर में धर्मपुर क्षेत्र की एक कॉलेज छात्रा का अपने किराए के कमरे में फंदे से लटका हुआ मृत अवस्था में पाया जाना अत्यंत गंभीर और चिंताजनक है। यह घटना इस बात का संकेत है कि अब छात्राएं अपने निजी स्थानों पर भी सुरक्षित नहीं रह गई हैं।
इसी क्रम में सुंदरनगर क्षेत्र में 11 वर्षीय बालक द्वारा 8 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आना समाज के नैतिक पतन और प्रशासनिक विफलता दोनों को उजागर करता है। इतनी कम उम्र में इस प्रकार का अपराध होना बेहद शर्मनाक और भयावह है।
इन सभी घटनाओं को देखते हुए स्पष्ट है कि हिमाचल प्रदेश में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ अपराध खतरनाक स्तर तक बढ़ चुके हैं। आज स्थिति यह बन चुकी है कि बेटियां और छात्राएं घर से बाहर निकलने में भी डर महसूस कर रही हैं।अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद प्रशासन से मांग करती है कि महिला सुरक्षा को लेकर तुरंत ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं, कानून व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाए और अपराधियों के खिलाफ त्वरित एवं कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। *प्रदेश सह मंत्री जहान्वी चौहान ने अपने बयान में यह भी कहा यदि सरकार और प्रशासन ने इन गंभीर घटनाओं पर तुरंत प्रभाव से सख्त कार्रवाई नहीं की , तो अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।* वर्तमान सरकार के कार्यकाल में जिस प्रकार महिला अपराधों का ग्राफ दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, वह कानून व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। यदि स्थिति को शीघ्र नहीं सुधारा गया, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।
