मंडी-सरदार पटेल विश्वविद्यालय, मण्डी के इतिहास विभाग द्वारा “मण्डी की 500 वर्षों की ऐतिहासिक यात्रा” विषय पर एक शोध गोष्ठी का आयोजन विभागीय सभागार में किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति आचार्य ललित कुमार अवस्थी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रख्यात साहित्यकार एवं इतिहासकार डॉ. गंगा राम राजी ने की। कार्यक्रम के संयोजक एवं इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार शर्मा ने उपस्थित विद्वानों का स्वागत करते हुए बताया कि विश्वविद्यालय की एक विशेष शोध परियोजना के अंतर्गत मण्डी के 500 वर्षों के इतिहास पर एक व्यापक पुस्तक का लेखन कार्य किया जा रहा है।
अपने आचार्य ललित कुमार अवस्थी ने मुख्य अतिथि संबोधन में कहा कि मण्डी का इतिहास केवल क्षेत्रीय इतिहास नहीं बल्कि हिमालयी सभ्यता और संस्कृति की एक महत्वपूर्ण धरोहर है।उन्होंने कहा कि इतिहास के प्रामाणिक दस्तावेजीकरण से भावी पीढ़ियों को अपने अतीत को समझने का अवसर मिलेगा। उन्होंने विद्वानों से आग्रह किया कि वे शोध आधारित एवं तथ्यपरक लेखन के माध्यम से मण्डी की ऐतिहासिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में योगदान दें। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा संचालित इस परियोजना को एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहल बताते हुए इसके सफल क्रियान्वयन के लिए इतिहास विभाग को बधाई दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए डॉ. गंगा राम राजी ने कहा कि किसी भी समाज की पहचान उसके इतिहास और सांस्कृतिक स्मृतियों से निर्मित होती है। मण्डी का इतिहास विविध आयामों से समृद्ध है, जिसके व्यवस्थित संकलन और प्रकाशन की आवश्यकता लंबे समय से अनुभव की जा रही थी। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक न केवल शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए उपयोगी सिद्ध होगी बल्कि मण्डी की ऐतिहासिक विरासत को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण संदर्भ ग्रंथ के रूप में स्थापित होगी। इस अवसर पर डॉ. राकेश कुमार शर्मा ने परियोजना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि पुस्तक में मण्डी रियासत के राजनीतिक इतिहास, धार्मिक परम्पराओं, पुरातात्विक धरोहरों, लोक संस्कृति, कला एवं स्थापत्य, स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान तथा आधुनिक विकास यात्रा जैसे विभिन्न विषयों को शामिल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य मण्डी की ऐतिहासिक यात्रा को शोधपरक एवं प्रामाणिक रूप में संकलित कर एक स्थायी अकादमिक दस्तावेज तैयार करना है। इसी उद्देश्य से लेखन कार्य से जुड़े विद्वानों की यह गोष्ठी आयोजित की गई है ताकि पुस्तक की रूपरेखा, विषय-वस्तु एवं शोध की दिशा पर विचार-विमर्श किया जा सके।
गोष्ठी में उपस्थित विद्वानों में डॉ.कमल प्यासा,डॉ. राकेश कपूर, डॉ. नरेश वैद्य, विनोद वहल, अनिल शर्मा, प्रकाश, मुरारी शर्मा,भगत राम गुलेरिया, सुनीता कपूर, अंशुल मल्होत्रा, समसेर मिन्हास,राजेन्द्र कुमार व विद्या शर्मा सहित ने अपने-अपने विषयों से संबंधित शोध पत्रों एवं लेखन कार्य की प्रगति पर विचार प्रस्तुत किए तथा पुस्तक के स्वरूप एवं सामग्री को और अधिक समृद्ध बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए। कार्यक्रम में सहायक आचार्य डॉ.रामपाल, राजेश शर्मा शोधार्थी वेद प्रकाश,डोल्मा, सुरेखा, राजु, सूर्य प्रकाश सहित विद्यार्थी एवं शोधार्थी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
विशेष आकर्षण के रूप में हुआ पुस्तक कहानी संग्रह ‘नारी का दिल’ विमोचन
इस अवसर पर दिवंगत विख्यात इतिहासकार एवं शिक्षाविद् डॉ. एम. एस. अहलूवालिया द्वारा रचित कहानी संग्रह ‘नारी का दिल’ का भी विमोचन किया गया। इस कृति का संपादन उनके शिष्य एवं इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार शर्मा ने अपने गुरु को श्रद्धांजलि स्वरूप किया है। पुस्तक का विमोचन मुख्य अतिथि कुलपति आचार्य ललित कुमार अवस्थी, अध्यक्ष डॉ. गंगा राम राजी तथा उपस्थित विद्वानों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
अपने वक्तव्य में डॉ. राकेश कुमार शर्मा ने कहा कि डॉ. एम. एस. अहलूवालिया एक प्रतिष्ठित इतिहासकार, साहित्यकार, शिक्षक एवं संवेदनशील चिंतक थे। उनके साहित्य में समाज, मानवीय मूल्यों तथा नारी जीवन की विविध अनुभूतियों का सजीव चित्रण मिलता है। उन्होंने कहा कि यह संपादित कृति उनके प्रति श्रद्धा और सम्मान का एक विनम्र प्रयास है, जिससे नई पीढ़ी उनके साहित्यिक योगदान से परिचित हो सकेगी।
मुख्य अतिथि आचार्य ललित कुमार अवस्थी ने डॉ. अहलूवालिया के साहित्यिक अवदान को स्मरण करते हुए कहा कि ऐसे रचनाकार समाज की सांस्कृतिक चेतना को समृद्ध करते हैं। वहीं अध्यक्ष डॉ. गंगा राम राजी ने पुस्तक को डॉ. अहलूवालिया की रचनात्मक दृष्टि का महत्वपूर्ण दस्तावेज बताते हुए इसके प्रकाशन को साहित्य जगत के लिए एक सराहनीय उपलब्धि बताया।
