हिमाचली के तीन हिंदी उपन्यास अंग्रेजी में प्रकाशित, विश्व साहित्य में बनेगी पहचान -मुरारी शर्मा के देबकू एक प्रेमकथा, गंगाराम राजी के जनरल जोरावर सिंह और त्रिलोक मेहरा के मुंडू का अंग्रेजी में अनुवाद
admin
August 9, 2026
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मंडी-हिमाचल के तीन साहित्यकारों के हिंदी उपन्यास अंग्रेजी में प्रकाशित होकर अब वैश्विक स्तर पर दस्तक देंगे। हिमाचल के चर्चित साहित्यकार मुरारी शर्मा का हिंदी उपन्यास देबकू एक प्रेम कथा, गंगाराम राजी का उपन्यास जनरल जोराबर सिंह और त्रिलोक मेहरा के उपन्यास मुंडू अब अंग्रेजी में प्रकाशित हो गये हैं। हिंदी के इन तीन मशहूर उपन्यासों का युवा साहित्यकार पंकज दर्शी द्वारा अंग्रेजी में अनुवाद किया गया है। जिन्हें इंडिया नेटबुक्स प्रा.लि. की ओर से प्रकाशित किया गया है। जिसके चलते अब ये तीनों उपन्यास विश्व साहित्य के पाठकों के लिए एमाजोन व फ्लिप कार्ड पर उपलब्ध रहेंगे। जिनका आने वाले समय में गरिमामय समारोह में विमोचन किया जाएगा। राजनीतिक हंगामें और भ्रामक प्रचार के माहौल के बीच साहित्य के पाठकों के लिए यह सुकून भरी एवं सुखद खबर है। अब हिंदी के ये उपन्यास दुनिया भर के पाठकों के लिए उपलब्ध रहेंगे। इन तीनों उपन्यासों के अंग्रेजी में प्रकाशन से हिंदी के पाठकों की तरह अंग्रेजी के पाठक भी हिमाचली लोकसंस्कृति, इतिहास और जल, जंगल और जमीन के संघर्षों से रूबरू होंगे। युवा साहित्यकार अनुवादक पंकज दर्शी ने कहते हैं कि मेरा मंतव्य हिमाचल में लिखे गए बेहतर साहित्य को विश्व पटल पर लाया जाए, यह प्रयोग और कोशिश अब सफलता की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि देबकू एक प्रेमकथा , जनरल जोरावर सिंह और मुंडू तीनों ऐसे उपन्यास हैं जिनका अनुवाद मैंने स्वेच्छा से किया है।जिनमें मुरारी शर्मा का उपन्यास देबकू एक प्रेमकथा अंग्रेजी में द मेलैंकोलिक देबकू , गंगाराम राजी का उपन्यास जनरल जोरावर सिंह द नेपोलियन आफ नॉथ इंडिया और मुंडू शामिल हैं।
अब ये तीनों ही उपन्यास इंडिया नेट बुक्स से प्रकाशित हो गए हैं।…अब यह विश्व भर के लोगों के लिए उपलब्ध हैं।
उन्होंने बताया कि मुरारी शर्मा के उपन्यास देबकू एक प्रेमकथा के माध्यम से मंडी के अतीत के दर्शन हुए हैं। द मेलैंकोलिक देबकू (The Melancholic Debkoo) एक ऐतिहासिक कथा है और यह अपनी सामग्री के कारण लगभग सभी पाठकों को आकर्षित करता है। जिसमें एक अतुलनीय प्रेम-कहानी, राजनीतिक चतुरता, हत्याएं, सत्ता और संपत्ति की लालसा, किशोरावस्था की मासूमियत, जनसांख्यिकी, कुरीतियां, सामाजिक कलंक, संकीर्ण मानसिकता, अंधविश्वासी व्यवहारशामिल हैं। इसके अलावा वर्जनाएं , भूगोल, खाने-पीने की वस्तुएं और विशेष क्षेत्र यानी भारत के उत्तरी भाग के सौंदर्यप्रेमी।
इस उपन्यास की कहानी मुख्य पात्र देबकू के इर्द-गिर्द घूमती है, यह हमें उन सभी स्थानों की यात्रा पर ले जाती है जहां वह जाती है। देबकू अपने पाठकों को मंडी की मूल भूमि को जानने में सक्षम बनाता है, लेकिन कहानी केवल उसी के इर्द-गिर्द घूमती है और उसके माध्यम से हम 800 साल पहले के मंडी और इसके इतिहास के बारे में जान पाते हैं। देबकू की कहानी मंडी में आठ शताब्दियों की अवधि में कई संस्कृतियों और परंपराओं को दर्शाती है। उसी प्रकार गंगाराम राजी का जनरल जोरावर सिंह द नेपालियन आफ नार्थ इंडिया, शेन-पा चोर्टेन (Shen-pa Chorten) एक ऐतिहासिक कथा है। एक ऐसे बहादुर सेनानायक की गाथा है। जिसमें शामिल हैं: प्रेम-कहानी, बलात्कार का प्रयास, राजनीतिक चतुरता, हत्याएं, सत्ता और संपत्ति की लालसा, किशोरावस्था की मासूमियत, वीरता, और विशेष क्षेत्र यानी उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की जनसांख्यिकी। इस उपन्यास की कहानी मुख्य पात्र जोरावर सिंह के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी दुश्मनों ने समाधी बनाई है और आज भी प्रार्थना करते हैं कि ऐसा बहादुर बेटा उनके घर में भी जन्म ले। जनरल जोरावर की वजह से ही आज लेह लद्दाख हिंदुस्तान का हिस्सा है। इसके अलावा त्रिलोक मेहरा का उपन्यास जनसंघर्षों की मिसाल है। इस उपन्यास में उन्होंने पौंग बांध विस्थापितों के जीवन संघर्ष का मार्मिकता से उजागर किया है। तीनों ही उपन्यास अपने-अपने विषय वस्तु को लेकर लाजवाब हैं। हिंदी में इन तीनों उपन्यासों को हिंदी के पाठकों ने खूब सराहा है। अब अंग्रेजी में प्रकाशित होने से इनका दायरा वैश्विक हो गया है, विश्वभर के पाठकों के लिए ये उपन्यास एक सौगात के रूप में उपलब्ध हैं।
अंग्रेजी में प्रकाशित हिंदी के तीन उपन्यास।
अब ये तीनों ही उपन्यास इंडिया नेट बुक्स से प्रकाशित हो गए हैं।…अब यह विश्व भर के लोगों के लिए उपलब्ध हैं।उन्होंने बताया कि मुरारी शर्मा के उपन्यास देबकू एक प्रेमकथा के माध्यम से मंडी के अतीत के दर्शन हुए हैं। द मेलैंकोलिक देबकू (The Melancholic Debkoo) एक ऐतिहासिक कथा है और यह अपनी सामग्री के कारण लगभग सभी पाठकों को आकर्षित करता है। जिसमें एक अतुलनीय प्रेम-कहानी, राजनीतिक चतुरता, हत्याएं, सत्ता और संपत्ति की लालसा, किशोरावस्था की मासूमियत, जनसांख्यिकी, कुरीतियां, सामाजिक कलंक, संकीर्ण मानसिकता, अंधविश्वासी व्यवहारशामिल हैं। इसके अलावा वर्जनाएं , भूगोल, खाने-पीने की वस्तुएं और विशेष क्षेत्र यानी भारत के उत्तरी भाग के सौंदर्यप्रेमी।
इस उपन्यास की कहानी मुख्य पात्र देबकू के इर्द-गिर्द घूमती है, यह हमें उन सभी स्थानों की यात्रा पर ले जाती है जहां वह जाती है। देबकू अपने पाठकों को मंडी की मूल भूमि को जानने में सक्षम बनाता है, लेकिन कहानी केवल उसी के इर्द-गिर्द घूमती है और उसके माध्यम से हम 800 साल पहले के मंडी और इसके इतिहास के बारे में जान पाते हैं। देबकू की कहानी मंडी में आठ शताब्दियों की अवधि में कई संस्कृतियों और परंपराओं को दर्शाती है। उसी प्रकार गंगाराम राजी का जनरल जोरावर सिंह द नेपालियन आफ नार्थ इंडिया, शेन-पा चोर्टेन (Shen-pa Chorten) एक ऐतिहासिक कथा है। एक ऐसे बहादुर सेनानायक की गाथा है। जिसमें शामिल हैं: प्रेम-कहानी, बलात्कार का प्रयास, राजनीतिक चतुरता, हत्याएं, सत्ता और संपत्ति की लालसा, किशोरावस्था की मासूमियत, वीरता, और विशेष क्षेत्र यानी उत्तर-पूर्वी क्षेत्र की जनसांख्यिकी। इस उपन्यास की कहानी मुख्य पात्र जोरावर सिंह के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसकी दुश्मनों ने समाधी बनाई है और आज भी प्रार्थना करते हैं कि ऐसा बहादुर बेटा उनके घर में भी जन्म ले। जनरल जोरावर की वजह से ही आज लेह लद्दाख हिंदुस्तान का हिस्सा है। इसके अलावा त्रिलोक मेहरा का उपन्यास जनसंघर्षों की मिसाल है। इस उपन्यास में उन्होंने पौंग बांध विस्थापितों के जीवन संघर्ष का मार्मिकता से उजागर किया है। तीनों ही उपन्यास अपने-अपने विषय वस्तु को लेकर लाजवाब हैं। हिंदी में इन तीनों उपन्यासों को हिंदी के पाठकों ने खूब सराहा है। अब अंग्रेजी में प्रकाशित होने से इनका दायरा वैश्विक हो गया है, विश्वभर के पाठकों के लिए ये उपन्यास एक सौगात के रूप में उपलब्ध हैं।अंग्रेजी में प्रकाशित हिंदी के तीन उपन्यास।
