मंडी-हिमाचल प्रदेश की छोटी काशी मंडी की मस्जिद के कथित अवैध हिस्से को हटाने के मामले में नया मोड़ आ गया है। नगर नियोजन विभाग (TCP) के प्रधान सचिव देवेश कुमार ने नगर निगम (MC) आयुक्त मंडी के 13 सितंबर को जारी हुए उन आदेशों पर रोक लगा दी है, जिसमें MC आयुक्त ने मस्जिद की दो मंजिल हटाने के आदेश दिए थे। इन आदेशों के बाद अब इस मामले में मुस्लिम पक्ष को फिलहाल कुछ राहत मिल गई है। आगामी आदेशों तक मस्जिद पर कोई कार्रवाई नहीं की जा सकेगी। मंडी मस्जिद मामले में अगली सुनवाई 20 अक्टूबर के बाद अब प्रधान सचिव टीसीपी के कोर्ट में होगी। देवेश कुमार ने नगर निगम मंडी को ऑफिस रिकॉर्ड के साथ अपना पक्ष रखने के लिए कहा है। इस रिकार्ड के आधार मंडी मस्जिद को लेकर अंतिम फैसला होगा। प्रधान सचिव ने यह आदेश मुस्लिम पक्ष द्वारा दायर अपील पर सुनवाई के बाद दिए है।
निगम आयुक्त ने 13 सितंबर को दिए थे तोड़ने के आदेश
बता दें कि नगर निगम आयुक्त मंडी एचएस राणा ने बीते 13 सितंबर को मंडी के जेल रोड में बनी मस्जिद ती दो मंजिल 30 दिन के भीतर हटाने के आदेश दिए थे। यहां पर मुस्लिम समुदाय ने तीन मंजिला मस्जिद बना दी थी।
कोर्ट के आदेशों पर मंडी मस्जिद का काटा गया है बिजली व पानी

हिंदू संगठनों का आरोप है कि मंडी में आजादी के बाद एक मंजिला मस्जिद थी। मगर यहां पर बीते कुछ सालों के दौरान सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करके तीन मंजिला मस्जिद बनाई गई। लिहाजा इसे गिराने के लिए मंडी में हिंदू संगठनों ने दो बार प्रदर्शन किया।
मुस्लिम पक्ष ने दी ये दलील
प्रधान सचिव की कोर्ट में सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष ने अवैध निर्माण की बात को नकारा और कहा, 2013 में बारिश के कारण मस्जिद का मुख्य हिस्सा गिरा था, जिसे अगस्त 2023 को फिर से बनाया है। मुस्लिम पक्ष ने कहा, आयुक्त कोर्ट ने उनका पक्ष नहीं सुना और फैसला सुना दिया। मुस्लिम पक्ष की दलीलों के अनुसार 1936 से मस्जिद 478 नंबर खसरा में स्थित थी, जबकि 1962 में राजस्व रिकार्ड में बदलाव के बाद मस्जिद खसरा नंबर 1280, 2216 व 2117 में 300.53 स्कवेयर मीटर और खसरा नंबर 2218 से 2221 तक 85.6 वर्ग मीटर पर है, जो कि कुल 386.19 वर्ग मीटर बनता है और यह क्षेत्र अहले इस्लाम के नाम से दर्ज है। लगभग 100 वर्षों से अधिक समय इसी जगह पर है।

मामले की जानकारी देते हुए नगर निगम मंडी के आयुक्त एचएस राणा ने कहा कि नगर निगम मंडी द्वारा अवैध मस्जिद को हटाने के आदेश बीते दिनों दिए गए थे लेकिन हर मामले की आगे अपील की जा सकती है। इसी को लेकर अब मामले को लेकर स्टे आर्डर जारी हुआ हैं। जब तक स्टे आर्डर जारी रहेगा उस समय तक नगर निगम इस पर कोई भी फैसला नहीं लेगा।
