मंडी- कॉलेज ऑफ एजुकेशन में आज युवाओं के साथ “भारत का भविष्य और युवाओं की भूमिका” विषय पर एक अत्यंत सार्थक एवं संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम में युवाओं की राष्ट्र निर्माण में भूमिका, उद्यमिता, आत्मनिर्भरता, रोजगार सृजन तथा विकसित भारत के संकल्प जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।
इस अवसर पर प्रो. अनूपमा सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का भविष्य उसकी युवा शक्ति पर निर्भर है। आज के युवाओं को केवल नौकरी पाने की मानसिकता तक सीमित न रहकर नए अवसर पैदा करने, उद्यमिता अपनाने और दूसरों के लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर युवा ही आत्मनिर्भर समाज और सशक्त राष्ट्र की नींव रख सकता है।
उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय लेते समय अपनी प्रतिभा, रुचि और क्षमता को पहचानें तथा पारंपरिक करियर विकल्पों के साथ-साथ स्टार्टअप, स्वरोजगार, नवाचार और उद्यमिता की संभावनाओं पर भी विचार करें। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल सरकार के प्रयासों से नहीं, बल्कि देश के प्रत्येक युवा की सक्रिय भागीदारी से पूरा होगा।
प्रो. सिंह ने कहा कि युवा केवल भारत के भविष्य के नागरिक नहीं हैं, बल्कि आज के भारत के निर्माण में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उनकी ऊर्जा, रचनात्मकता, तकनीकी क्षमता और नए विचार देश को नई दिशा दे सकते हैं।
कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए उन्होंने नोबल कॉलेज ऑफ एजुकेशन के प्रधानाचार्य एवं समस्त स्टाफ का हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से जसवंत यादव जी, सुनील डोगरा जी एवं शिल्पा जी द्वारा कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की और उनके आत्मीय स्वागत एवं आतिथ्य के लिए धन्यवाद दिया।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस संवाद के माध्यम से विद्यार्थियों को अपने भविष्य के बारे में नए दृष्टिकोण से सोचने की प्रेरणा मिलेगी और वे अपने व्यक्तिगत विकास के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण एवं विकसित भारत के संकल्प में सक्रिय योगदान देने का संकल्प लेंगे।
“सशक्त युवा — आत्मनिर्भर भारत की पहचान और विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत है।”
