शतरंज की बिसात से जीवन की सीख तक प्रेरणा बनी, मौर्य वैद्य की पहली पुस्तक 12वीं कक्षा के छात्र और शतरंज खिलाड़ी मौर्य वैद्य ने लिखी साइकोलोजी आफ 64 स्कवायरज
admin
August 25, 2026
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मंडी-शतरंज केवल 64 खानों और 32 मोहरों का खेल नहीं, बल्कि धैर्य, रणनीति, निर्णय और जीवन को समझने की एक खूबसूरत कला है। दुबई निवासी मौर्य वैद्य जो मंडी के मशहूर एडवोकेट एवं एसवीएम स्कूल के प्रंबध समिति के सदस्य स्व. सुंदर गोयल के नाती हैं, ने छोटी सी उम्र में शतरंज के खेल के अनुभवों पर साइकोलोजी आफ 64 स्कवायरज किताब लिख डाली है। मौर्य की माता श्रुति गोयल ने बताया कि मौर्य जब तीन महीने का था तभी से उनका परिवार दुबई शिफ्ट हो गया। उन्होंने बताया कि बचपन से ही मौर्य को किताबें पढ़ने का शैक रहा है, जबकि उसके पापा ने घर पर ही उसे शतरंज खेलना सिखाया। इसके बाद उसे इसका प्रशिक्षण भी दिलाया और वह शतरंज का माहिर खिलाड़ी बन कर उभरा। श्रुति गोयल ने बताया कि जब वह नवीं कक्षा का छात्र था तब उसने बताया था कि शतरंज उसे जिंदगी की तरह लगती है और वह इस विषय पर किताब लिखना चाहता है। इसके पश्चात वह लिखता रहा और इसी सोच को अपनी लेखनी के माध्यम से सामने लाते हुए 12वीं कक्षा के छात्र और शतरंज खिलाड़ी मौर्य वैद्य ने अपनी पहली पुस्तक साइकोलोजी आफ 64 स्कवायरज लिख डाली। उसने यह एक प्रेरणादायक उपलब्धि हासिल की है।
बचपन से ही शतरंज के प्रति गहरी रुचि रखने वाले मौर्य ने इस खेल को केवल प्रतियोगिताओं और जीत-हार तक सीमित नहीं रखा। बल्कि इसे अपने व्यक्तिगत जीवन से भी जोड़ा। उनकी पुस्तक में शतरंज की चालों और रणनीतियों के साथ-साथ उनके अपने अनुभव, विचार और जीवन से जुड़ी सीख भी दिखाई देती है। मौर्य को शतरंज ने कई महत्वपूर्ण बातें सिखाई । जैसे धैर्य रखना, सही समय पर निर्णय लेना, हार से सीखना, अपनी गलतियों को स्वीकार करना और हर परिस्थिति में अगली चाल के बारे में सोचना। इन्हीं अनुभवों को उन्होंने अपनी पुस्तक के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया है।
एक FIDE-rated खिलाड़ी के रूप में शतरंज की प्रतिस्पर्धात्मक दुनिया को करीब से देखने वाले मौर्य ने महसूस किया कि शतरंज और जीवन में गहरी समानताएं हैं। जिस तरह शतरंज की बिसात पर एक छोटी-सी गलती पूरी बाज़ी का रुख बदल सकती है। उसी तरह जीवन में भी हमारे फ़ैसले हमारे भविष्य को तय करते हैं। साइकोलोजी आफ 64 स्कवायरज इसी खूबसूरत जुड़ाव की कहानी है, शतरंज की बिसात पर सीखी गई बातों और वास्तविक जीवन के अनुभवों का संगम। 12वीं कक्षा की पढ़ाई के साथ पुस्तक लिखना मौर्य की मेहनत, अनुशासन और रचनात्मक सोच को दर्शाता है। परिवार और मित्रों के लिए यह उपलब्धि गर्व और खुशी का विशेष अवसर है। मौर्य वैद्य की यह पहली पुस्तक उनके शतरंज के सफर की सिर्फ शुरुआत है। एक ऐसी शुरुआत, जिसमें हर चाल के पीछे एक कहानी है, हर बाज़ी के पीछे एक अनुभव है और हर खेल में जीवन की एक नई सीख छिपी है। आजकल मौर्य अपने ननिहाल मंडी के प्रवास पर है, अपनी पहली पुस्तक को लेकर वह बहुत रोमांचित महसूस कर रहा है।
कैप्शन-अपनी पुस्तक के साथ मौर्य वैद्य।
बचपन से ही शतरंज के प्रति गहरी रुचि रखने वाले मौर्य ने इस खेल को केवल प्रतियोगिताओं और जीत-हार तक सीमित नहीं रखा। बल्कि इसे अपने व्यक्तिगत जीवन से भी जोड़ा। उनकी पुस्तक में शतरंज की चालों और रणनीतियों के साथ-साथ उनके अपने अनुभव, विचार और जीवन से जुड़ी सीख भी दिखाई देती है। मौर्य को शतरंज ने कई महत्वपूर्ण बातें सिखाई । जैसे धैर्य रखना, सही समय पर निर्णय लेना, हार से सीखना, अपनी गलतियों को स्वीकार करना और हर परिस्थिति में अगली चाल के बारे में सोचना। इन्हीं अनुभवों को उन्होंने अपनी पुस्तक के माध्यम से पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया है।
एक FIDE-rated खिलाड़ी के रूप में शतरंज की प्रतिस्पर्धात्मक दुनिया को करीब से देखने वाले मौर्य ने महसूस किया कि शतरंज और जीवन में गहरी समानताएं हैं। जिस तरह शतरंज की बिसात पर एक छोटी-सी गलती पूरी बाज़ी का रुख बदल सकती है। उसी तरह जीवन में भी हमारे फ़ैसले हमारे भविष्य को तय करते हैं। साइकोलोजी आफ 64 स्कवायरज इसी खूबसूरत जुड़ाव की कहानी है, शतरंज की बिसात पर सीखी गई बातों और वास्तविक जीवन के अनुभवों का संगम। 12वीं कक्षा की पढ़ाई के साथ पुस्तक लिखना मौर्य की मेहनत, अनुशासन और रचनात्मक सोच को दर्शाता है। परिवार और मित्रों के लिए यह उपलब्धि गर्व और खुशी का विशेष अवसर है। मौर्य वैद्य की यह पहली पुस्तक उनके शतरंज के सफर की सिर्फ शुरुआत है। एक ऐसी शुरुआत, जिसमें हर चाल के पीछे एक कहानी है, हर बाज़ी के पीछे एक अनुभव है और हर खेल में जीवन की एक नई सीख छिपी है। आजकल मौर्य अपने ननिहाल मंडी के प्रवास पर है, अपनी पहली पुस्तक को लेकर वह बहुत रोमांचित महसूस कर रहा है।
कैप्शन-अपनी पुस्तक के साथ मौर्य वैद्य।
