मंडी-कांग्रेस नेता पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से पात्र नागरिकों के नाम हटाने और नए मतदाताओं को जोड़ने की प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है। कौल सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले में नैतिक जिम्मेदारी लेने तथा देश के मतदाताओं से माफी मांगने की मांग की। साथ ही उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उनके इस्तीफे और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई।
कौल सिंह ठाकुर मंडी में आयोजित पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि लोकतंत्र की बुनियाद स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव है और मताधिकार का प्रयोग करना प्रत्येक नागरिक का विशेष अधिकार है। यदि किसी योग्य मतदाता का नाम मतदाता सूची से गलत तरीके से हटा दिया जाता है, तो यह उसके लोकतांत्रिक अधिकार को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले प्रत्येक पात्र भारतीय नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल किया जाना चाहिए, जबकि मृत अथवा अपात्र व्यक्तियों के नाम नियमानुसार हटाए जाने चाहिए।
बिहार और पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची की प्रक्रिया पर उठाए सवाल
कौल सिंह ने बिहार और पश्चिम बंगाल सहित विभिन्न राज्यों में मतदाता सूची के संशोधन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने लगभग 12 करोड़ 77 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने के दावे का उल्लेख करते हुए इन आंकड़ों की जांच और प्रभावित पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा सूची में शामिल करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों और पारदर्शी व्यवस्था के तहत होनी चाहिए। किसी भी नागरिक को केवल प्रशासनिक लापरवाही या कथित अनियमितता के कारण मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
चुनाव आयोग की निष्पक्षता और जवाबदेही पर सवाल
कौल सिंह ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पक्षपातपूर्ण दिखाई दे रही है। उन्होंने चुनाव आयुक्तों को कानूनी संरक्षण देने संबंधी प्रावधानों पर भी आपत्ति जताई और कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता के साथ उनकी जवाबदेही भी सुनिश्चित होनी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों की जांच कर जिम्मेदारी तय की जाए और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए। कौल सिंह ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई और उनके इस्तीफे की मांग भी दोहराई।
शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार की रक्षा पर जोर
कौल सिंह ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान कथित दुर्व्यवहार और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में नागरिकों को सरकार की नीतियों और निर्णयों के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार है। इस अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए और लोगों की शिकायतों का समाधान लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत किया जाना चाहिए।
पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने और निष्पक्ष जांच की मांग
कौल सिंह ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची की शुद्धता, चुनाव आयोग की पारदर्शिता और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है। उन्होंने मांग की कि पात्र मतदाताओं के नाम सूची में शामिल किए जाएं, गलत तरीके से हटाए गए नामों की जांच हो और पूरे मामले में तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाए।
उन्होंने कहा कि मताधिकार की रक्षा किसी एक राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि लोकतंत्र और प्रत्येक पात्र नागरिक के अधिकार का सवाल है। कौल सिंह ने इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठाते रहने की बात कही।
