मंडी.भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अजय राणा ने हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार द्वारा स्टांप ड्यूटी की विभिन्न श्रेणियों में की गई भारी बढ़ोतरी पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सुक्खू सरकार लगातार ऐसे फैसले ले रही है, जिनका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की आर्थिक नीतियों की विफलता का खामियाजा अब आम नागरिकों को सरकारी शुल्कों में बढ़ोतरी के रूप में भुगतना पड़ रहा है।
अजय राणा ने कहा कि जिन दस्तावेजों और कानूनी प्रक्रियाओं के लिए पहले ₹100 का स्टांप शुल्क देना पड़ता था, उनमें कुछ श्रेणियों में इसे बढ़ाकर ₹1,000 तक कर दिया गया है। यानी शुल्क में दस गुना तक की वृद्धि की गई है। यह फैसला आम जनता के लिए किसी अतिरिक्त आर्थिक बोझ से कम नहीं है। शपथपत्र, समझौते, संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के लिए नागरिकों को अब पहले की तुलना में अधिक राशि खर्च करनी पड़ेगी।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में पहले ही महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक संकट से आम जनता परेशान है। ऐसे समय में सरकार को राहत देने वाले फैसले लेने चाहिए थे, लेकिन इसके विपरीत सरकार विभिन्न सरकारी शुल्कों में बढ़ोतरी कर जनता की मुश्किलें और बढ़ा रही है। छोटे व्यापारियों, किसानों, युवाओं और मध्यमवर्गीय परिवारों को भी इस तरह के फैसलों का सीधा असर झेलना पड़ सकता है।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने सवाल उठाया कि आखिर सरकार को स्टांप ड्यूटी में इतनी बड़ी बढ़ोतरी करने की आवश्यकता क्यों पड़ी? क्या प्रदेश सरकार के पास अपने आर्थिक संसाधन बढ़ाने के लिए जनता पर अतिरिक्त बोझ डालने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है? उन्होंने कहा कि सरकार को प्रदेश की आर्थिक स्थिति और राजस्व प्रबंधन को लेकर अपनी नीति स्पष्ट करनी चाहिए।
अजय राणा ने कहा कि कांग्रेस सरकार सत्ता में आने से पहले जनता को राहत देने और आर्थिक व्यवस्था सुधारने के बड़े-बड़े वादे करती थी, लेकिन आज स्थिति यह है कि आम नागरिक को हर स्तर पर बढ़े हुए खर्च का सामना करना पड़ रहा है। सरकार को अपनी आर्थिक नीतियों की विफलता छिपाने के बजाय आत्ममंथन करना चाहिए।
उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की कि स्टांप ड्यूटी में की गई इस बढ़ोतरी के फैसले पर पुनर्विचार किया जाए और आम नागरिकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से राहत दी जाए। उन्होंने कहा कि भाजपा जनहित से जुड़े ऐसे मुद्दों को लगातार उठाती रहेगी और जनता पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ का विरोध करेगी।
