मंडी : भाजपा मुख्य प्रवक्ता एवं विधायक राकेश जम्बाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू प्रदेश के विकास और जनसमस्याओं पर ध्यान देने के बजाय अपनी ही सरकार के मंत्रियों को निपटाने में लगे हुए हैं। प्रदेश की जनता परेशान है, प्रशासनिक व्यवस्था चरमरा रही है और सरकार के भीतर आपसी खींचतान लगातार सामने आ रही है।जम्बाल ने कहा कि प्रदेश के हालात कितने खराब हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आए दिन कानून व्यवस्था, विकास कार्यों और प्रशासनिक फैसलों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। लेकिन मुख्यमंत्री का पूरा ध्यान अपनी ही सरकार के भीतर शक्ति संतुलन बनाने और अपने से अलग राय रखने वाले लोगों को कमजोर करने पर दिखाई देता है।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुक्खू की कार्यशैली अब इतनी स्पष्ट हो चुकी है कि जो मंत्री उनके हिसाब से चले, उसके लिए सब ठीक है, लेकिन जो अपने विभाग में अपनी समझ और अधिकार के अनुसार काम करने की कोशिश करे, उसे किनारे करने के रास्ते तलाशे जाते हैं।
राकेश जम्बाल ने कहा कि कुछ समय पहले उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि जो लोग सरकार के विरोध में हैं, उन्हें “रात के अंधेरे में निपटा दो।” आज स्थिति यह है कि मुख्यमंत्री सुक्खू ने अपने ही उपमुख्यमंत्री को दिन के उजाले में ही निपटा दिया, रात के अंधेरे का इंतजार भी नहीं किया।
उन्होंने कहा कि पिछले कल मंडी में एचआरटीसी की नई बसों को हरी झंडी दिखाने का कार्यक्रम इसका ताजा उदाहरण है। परिवहन विभाग के मंत्री के मंडी पहुंचने से पहले और विभाग से जुड़े कार्यक्रम के बीच मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम की कमान अपने हाथ में लेकर यह संदेश दे दिया कि सरकार में विभागीय मंत्री की भूमिका कितनी सीमित कर दी गई है।जम्बाल ने कहा कि यह वही सरकार है जिसमें एक उपमुख्यमंत्री को कभी विरोधियों से “रात के अंधेरे में निपटने” की सलाह देते सुना गया था, लेकिन आज वही उपमुख्यमंत्री मुख्यमंत्री की राजनीतिक कार्यशैली के सामने दिन के उजाले में ही हाशिये पर दिखाई दे रहे हैं।राकेश ने कहा कि दूसरा मामला शिक्षा विभाग से जुड़ा है। पिछले दिनों चर्चा सामने आई कि एक विद्यालय के उद्घाटन कार्यक्रम को शिक्षा मंत्री के स्तर से किए जाने से रोक दिया गया और इसके पीछे कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी द्वारा उद्घाटन किए जाने की बात कही गई। अब मौसम का हवाला देकर वह कार्यक्रम भी रद्द हो गया और उद्घाटन वर्चुअल माध्यम से मुख्यमंत्री द्वारा किए जाने की बात सामने आई है।
उन्होंने कहा कि इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या होगा कि प्रदेश का शिक्षा मंत्री अपने विभाग के विद्यालय का उद्घाटन भी अपनी इच्छा और विभागीय अधिकार के अनुसार नहीं कर सकता। इसी तरह परिवहन मंत्री अपने विभाग की बसों के कार्यक्रम को लेकर स्वतंत्र निर्णय नहीं ले सकता। अगर मंत्रियों को अपने ही विभाग में काम करने की स्वतंत्रता नहीं है, तो फिर मुख्यमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि मंत्रिमंडल में बाकी मंत्रियों की भूमिका आखिर क्या रह गई है?
कांग्रेस सरकार में मंत्री नहीं, मुख्यमंत्री ही ‘सुप्रीम पावर’ : जम्बाल
राकेश जम्बाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार में लोकतांत्रिक मंत्रिमंडलीय व्यवस्था की जगह एक व्यक्ति की सत्ता हावी होती जा रही है। मुख्यमंत्री स्वयं को हर विभाग से ऊपर समझते हैं और जो मंत्री उनके अनुसार काम करे, उसे आगे रखा जाता है, जबकि जो मंत्री अपने विभाग में स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने का प्रयास करे, उसके अधिकारों को सीमित करने के तरीके तलाशे जाते हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता सब देख रही है। मुख्यमंत्री को अपने मंत्रियों से राजनीतिक प्रतिस्पर्धा करने के बजाय प्रदेश के विकास पर ध्यान देना चाहिए। सरकार के भीतर कौन किसे निपटा रहा है, इससे आम जनता का कोई लेना-देना नहीं है। जनता को सड़क, रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा और बेहतर प्रशासन चाहिए।
जम्बाल ने कहा कि मुख्यमंत्री को यह समझना होगा कि हिमाचल प्रदेश किसी व्यक्ति की निजी जागीर नहीं है। प्रदेश की जनता ने कांग्रेस को सत्ता इसलिए दी थी कि सरकार जनहित में काम करेगी, लेकिन आज सरकार के भीतर ही वर्चस्व की लड़ाई दिखाई दे रही है।
उन्होंने मुख्यमंत्री से आह्वान किया कि अपने मंत्रियों को कमजोर करने और राजनीतिक रूप से निपटाने की राजनीति छोड़कर प्रदेश की जनता के हित में काम करें। कांग्रेस सरकार के भीतर चल रही इस खींचतान से प्रदेश का नुकसान हो रहा है और जनता अब इसका जवाब जरूर मांगेगी।
