गुरुवार को सम्पति देवी मैमोरियल नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं ने विश्व मलेरिया दिवस पर श्री लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में आए मरीजों को मलेरिया के बारे में जागरूक करवाया।मरीजों को मलेरिया के कारणों के बारे में बताया, कि मलेरिया किन कारणों से होता है तथा इसकी रोकथाम के बारे में अवगत करवाया।बच्चों ने लोगों को पोस्टर, सलोगन तथा चार्ट के माध्यम से लोगों के इसकी रोकथाम के बारे में बताया तथा छात्रों ने जागरूक किया कि इस अवसर पर पोस्टर मेकिंग, स्लोगन व भाषण प्रतियोगिता करवाई गई जिसमें बच्चों ने भारी उत्साह से भाग लिया।कॉलेज के निदेशक चंद्र शेखर ने जानकारी देते हुए कहा कि मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम देश के सबसे पहले चलाए जाने वाले स्वास्थ्य कार्यक्रमों में से है जो सन 1953 से आरम्भ किया गया था। जिसमें मलेरिया रोग पर नियंत्रण व नियंत्रण पर ध्यान केंद्रीत किया गया क्योंकि उस समय भारी संख्या में इस बिमारी से जाने जाती थी ।इसलिए मलेरिया के लक्ष्णो की पहचान करके क्लोरोक्विन नामक दवा दी जाती थी तत्पश्चात 1958 से मच्छरों की रोकथाम के लिए डी ड़ी टी का छिडकाव किया जाता था । मलेरिया के लक्षणों में तेज बुखार, कंपकपी, जोडों का दर्द व भारी पसीना आना आदि होते है । यह संक्रमित मादा मच्छर के काटने से फैलता है जिसमे मलेरिया के परजीवी व्यक्ति के खून में लाल रक्त कोशिकाओं पर आक्रमण करता है। जिससे एनिमिया का खतरा बढ़ता है यदि समय पर पहचान व उपचार न हो तो यह जानलेवा साबित हो सकता है व इसके बचाव में आसपास पानी को न ठहरने देना, मच्छर का लार्वा मारने वाली दवा का छिडकाव, दवा युक्त मच्छरदानी का प्रयोग व पूरा शरीर ढके कपड़ों का प्रयोग प्रमुख हैं।सरकार द्वारा चलाए गए जागरुकता अभियानो के कारण इसकी घटनाओं में 2015 से 2023 तक 80% की कमी दर्ज की गई है तथा 2030 तक लक्ष्य रखा गया है कि यह स्वास्थ्य समस्या न रहे।
