मंडी-सात सौ सदस्यों वाली मंडी नागरिक सभा ने रविवार को अपनी आम सभा में नया अध्यक्ष चुन लिया है। हरीश वैद्य अब मंडी नागरिक सभा के अध्यक्ष होंगे। रवि कांत वैद्य ने चुनाव अधिकारी की जिम्मेवारी निभाते हुए हरीश वैद्य को नया अध्यक्ष चुने जाने का ऐलान किया। पैंतीस साल पुरानी नागरिक सभा मंडी के इन चुनावों में लगभग 250 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस मौके पर मंडी नगर निगम के महापौर वीरेंद्र भट्ट, पार्षदगण, सरदार पटेल विश्वविद्यालय की पूर्व प्रति कुलपति डॉ. अनुपमा सिंह समेत कई गणमान्य लोग भी मौजूद रहे। गौरतलब है कि आरक्षण विरोधी आंदोलन के दौरान 1990 में हुए मंडी गोलीकांड के बाद मंडी नागरिक सभा का गठन हुआ था।नौ साल तक लगातार नागरिक सभा के अध्यक्ष रहे ओ. पी. कपूर ने अपनी कार्यकारिणी को भंग करने का ऐलान किया तो नई कार्यकारिणी के गठन की प्रक्रिया आरंभ हुई। निवर्तमान महासचिव हरीश वैद्य का नाम प्रस्तावित हुआ और उसका अनुमोदन भी हुआ, मगर निवर्तमान अध्यक्ष ओ.पी. कपूर को ही बनाए रखने के लिए संविधान में संशोधन करने की मांग भी उठी।
चूंकि कार्यकारिणी भंग हो चुकी थी ऐसे में किसी तरह का संशोधन हो पाना संभव नहीं था। ऐसे में ओ. पी. कपूर के नाम का प्रस्ताव तो आया मगर निर्वाचन अधिकारी ने इसे संविधान के अनुरूप न बताते हुए हरीश वैद्य को नया अध्यक्ष चुने जाने का एलान कर दिया। इसके साथ ही कई अन्य पदो के लिए भी चुनाव होने थे मगर आम सभा ने सर्वसम्मत राय से चुने गए नए अध्यक्ष को दस दिन में नई कार्यकारिणी बनाने के लिए अधिकृत कर दिया। इससे पहले तीन घंटे तक खत्री सभा भवन में आम सभा की बैठक चली जिसमें शहर से जुड़े कई मुद्दे उठाए गए। पूर्व अध्यक्ष पीसी विष्ट, पूर्व खेल निदेशक टी एल वैद्य, प्रकाश वैद्य, पूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी के. के. मल्होत्रा ने भी कई मामले उठाए। भंग कार्यकारिणी के उपाध्यक्ष डॉ. अशोक अवस्थी, कोषाध्यक्ष मल्होत्रा, रवि कांत कपूर व महासचिव हरीश वैद्य ने अपने तीन साल के कार्यों का जिक्र किया।इस दौरान सबसे ज्वंलत मुद्दा मंडी शहर में पेयजल का संकट, सरदार पटेल विश्वविद्यालय के दर्जे को कम करने, पेयजल की दर्रे अत्याधिक बढ़ाना, 1 करोड़ 60 लाख खर्च करके भी मंडी शहर के विश्वकर्मा चौक पर पहाड़ी के फिर से गिर जाने, शहर के पैदल पथों की खस्ताहाली, सीवरेज लीकेज, सीसीटीवी कैमरों के खराब होने व एनएचएआई की भूमिका पर सवाल जैसे मुद्दे प्रमुखता के साथ उठे। इनको हल करने के लिए नीति बनाने की मांग भी उठाई गई। निर्णय लिया गया कि यदि प्रशासन, सरकार व संबंधित एजेंसियों मंडी की ज्वलंत समस्याओं को हल करने में आनाकानी करेंगी तो सभी संगठनों के साथ मिल कर नागरिक सभा आंदोलन का रास्ता अपनाएगी। नगर निगम के पार्षदों की भूमिका, गलियों में बार-बार टाइलों के टूटने, अधिकारियों की कंपनियों से मिलीभगत जैसे आरोप भी खूब लगे। इस दौरान डॉ. अशोक अवस्थी ने कहा कि 2027 में प्रदेश का यह ऐतिहासिक सांस्कृतिक नगर छोटी काशी अपनी स्थापना के 500 साल पूरे कर रहा है। इसे सब मिल कर भव्य तरीके से मनाएं, ऐसी योजना पर अभी से अमल करना शुरू करना होगा।
