मंडी -बेहतर समाज के निर्माण में साहित्य और पुस्तक संस्कृति की अहम भूमिका रहती है। समाज में पुस्तकों की भूमिका को लेकर भाषा एवं संस्कृति विभाग की ओर से संस्कृति सदन मंडी में विचार गोष्ठी का आयेाजन किया गया। इस अवसर पर सेवानिवृत कालेज प्राचार्य एवं कवि डा. राकेश कपूर ने गोष्ठी का अध्यक्षता की। वहीं पर मंडयाली कवि, टांकरी के विद्वान जगदीश कपूर विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। अपने अध्यक्षीय संबोधन में डा. राकेश कपूर ने कहा कि साहित्य समाज में मशाल बनकर मार्गदर्शक की भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि साहित्यकारों को अधिक संख्या में पुस्तकें लिखने के बजाय इस बात की ओर देना चाहिए कि उनके लिखे की समाज के लिए सार्थकता क्या है। उन्होंने कहा कि कई बार कम लिखा हुआ भी कालजयी हो जाता है। इस अवसर पर साहित्यकार मुरारी शर्मा ने कहा कि मंडी शहर कालांतर से ही साहित्य एवं कला प्रेमियों का शहर रहा है। उन्होंने कहा कि मंडी शहर देश के क्ष्याति प्राप्त साहित्यकारों एवं यायावरों की यात्राओं का पड़ाव रहा है। वहीं पर सहित्यिक अड्डेबाजी, कविगोष्ठियों का चलन मंडी की सांस्कृतिक परंपराओं का हिस्सा रहा है। जिसके लिए मंडी की मशहूर महाशे दी हट्टी और बाद में अलंकार टी स्टॉल का योगदान अहम रहा है। कवयित्री रूपेश्वरी शर्मा ने कहा कि मंडी में घंटाघर स्थित नगर पालिका की लाईब्रेरी और महाशे दी हट्टी पुस्तक प्रेमियों का आकर्षण रही है। जगदीश कपूर ने कहा कि मंडी शहर के बीच आज भी ऐसे स्थान की दरकार है जहां साहित्यिक पत्र-पत्रिकाओं के आलवा पुस्तकें उपलब्ध हों और साहित्यिक गोष्ठियां, कार्यशालाएं आयोजित की जा सके। वहीं पर भगत सिंह गुलेरिया ने कहा कि जिला पुस्तकालय मंडी में करीब अस्सी हजार किताबें हैं, जो अलमारियों में घुटकर रह गई है। क्योंकि वर्तमान में यह लाइब्रेरी न रहकर सैल्फ स्टडी सेंटर बनकर रह गया है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगे युवा इन किताबों का उपयोग नहीं करते हैं। जो पाठक इनका उपयोग करते भी थे, उन्हें अब बैठने का स्थान नहीं मिल पाता है।जिला भाषा अधिकारी रेवती सैनी ने कहा कि विभाग का प्रयास रहता है कि वो स्थानीय साहित्यकारों को उचित मंच प्रदान करे। वहीं पर उनकी पुस्तकों की बिक्री के लिए किताब घर की योजना शुय की गई है। इस अवसर पर मौजूद साहित्यकारों ने पुस्तक संस्कृति पर अपने विचार रखने के अलावा कविता पाठ भी किया। जिनमें रूपेश्वरी शर्मा, हरीप्रिया शर्मा, मुरारी शर्मा, जगदीश कपूर, निर्मला चंदेल, सुरेंद्र पाल वैद्य, किरण गुलेरिया, विद्या शर्मा, पौमिला ठाकुर, सरिता हांडा, भगत सिंह गुलेरिया, धर्म चंद वर्मा,मीना शर्मा आदि ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। वहीं धर्म चंद वर्मा व रूपेश्वरी शर्मा ने इस अवसर पर भयागढ़ा गीत गाकर कार्यक्रम को ज्यादा शानदार बनाया।
