मंडी -बालीचौकी क्षेत्र में बुधवार को एक रोमांचक और राहत भरा घटनाक्रम सामने आया, जब नलौण स्थित तीर्थन नदी के उफनते बहाव में फंसे एक घोरल को स्थानीय लोगों और विभागीय टीम की तत्परता से नई जिंदगी मिल गई। दोपहर करीब 3 बजे कुछ ग्रामीणों ने नदी में बहते इस वन्य जीव को देखा, जिसके बाद तुरंत बचाव प्रयास शुरू कर दिए गए।
स्थानीय लोगों ने बिना देरी किए पशुपालन विभाग और वन विभाग को सूचना दी। सूचना मिलते ही वन रक्षक जगदेव बालीचौकी और पशुपालन विभाग बंजार में तैनात मंगलौर निवासी भूपेंद्र शर्मा अपने साथियों के साथ मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू अभियान में जुट गए।
तेज बहाव, बर्फीला पानी और फिसलन भरे किनारे हर चुनौती के बीच टीम ने साहस दिखाया। काफी मशक्कत के बाद घोरल को काबू में कर सुरक्षित नदी से बाहर निकाला गया। रेस्क्यू के दौरान उसे हल्की चोटें आईं, जिनका मौके पर ही उपचार किया गया।
बचाव के बाद घोरल को वन विभाग के सुपुर्द कर दिया गया है, जहां उसकी निगरानी की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार उसकी हालत अब स्थिर है और पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उसे उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ा जाएगा।
उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले इसी क्षेत्र में एक बारहसिंघा भी जान बचाने के लिए नदी में कूद गया था, लेकिन उसे बचाने के बावजूद उसकी मौत हो गई थी। ऐसे में इस बार समय रहते की गई कार्रवाई ने एक और वन्य जीव की जान बचा ली।
वन विभाग नाचन के डीएफओ एसएस कश्यप ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि विभाग वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह सतर्क है और भविष्य में भी ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई जारी रहेगी।
