मंडी-स्व. हेमकांत कात्यायन, जिनकी लेखनी में हिमाचल की माटी की गंध और लोकजीवन की सच्ची तस्वीर मिलती है, उनकी स्मृति में सतोहल नाट्य प्रेक्षागृह गूंज उठा। उनकी बालकथा “महा ठग” का मंचन, निर्देशक विनोद राई और प्रस्तुति संयोजक सीमा शर्मा के प्रयासों से, केवल एक नाटक नहीं बल्कि उनके लेखन-संसार की आत्मा का जीवंत रूप प्रतीत हुआ।
कहानी का ठग केवल पात्र नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाने वाली छवि थी—जिसे दर्शकों ने गहराई से महसूस किया। अंत में सुरेश शर्मा ने कात्यायन जी के साहित्य और जनसेवा के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि दी और कहा कि उनका रचनात्मक बाल लेखन आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मार्गदर्शन है।
