मंडी-वीरवार को सर्व देवता सेवा समिति की आम सभा की बैठक शिव पाल शर्मा की अध्यक्षता में देव सदन /संस्कृति सदन मण्डी में आयोजित की गई। जिसमें निम्न मुद्दों पर चर्चा की गई। चुनाव प्रक्रिया पूरी करने की चर्चा के उपरांत घनश्याम कारदार देव छण्डैल सरोआ ने खड़े होकर पुरानी कार्यकारिणी को यथावत रखने के लिए सुझाव दिया। जिस सुझाव पर भीमचंद सरोच व खीमे राम ने अपनी सहमति दी ।जिस पर समस्त सदस्यों ने अपने दोनों हाथ उठाकर व ध्वनि मत से पुरानी कार्यकारिणी को ही आगामी 3 वर्ष के लिए चयनित किया और क्षेत्र बड़ा होने के कारण अन्य सदस्यों को चयन करने का अधिकार अध्यक्ष को दिया गया, ताकि कार्य सुचारू रूप से चल सके । इसके अतिरिक्त अध्यक्ष से यह भी अनुरोध किया गया कि शीघ्र ही कार्यकारिणी का विस्तार किया जाए। जिस पर अध्यक्ष ने समस्त कारदारों/गुर/पुजारी का धन्यवाद किया। नवनियुक्त अध्यक्ष ने
कहा कि आधा बीघा भूमि के बारे, 6 केस उपायुक्त द्वारा स्वीकृत कर दिए गए है तथा अन्य 3 केस जो भाषा अधिकारी द्वारा भेजे गए है वो भी शीघ्र स्वीकृति कर दिए जाएंगे तथा अन्य मामलों की कार्यवाही की जा रही है, अध्यक्ष ने समस्त कारदारों से अनुरोध किया कि अपने केस संबंधित अधिकारी को शीघ्र भेजे। इस ऐतिहासिक फैसले पर मुख्यमत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू एवम् उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन जिला मण्डी का समस्त कारदारों ने तहे दिल से धन्यवाद किया।उन्होंने।
कहा किशिवरात्रि के दौरान जो देवी-देवताओं को गत दो वर्षों से सीढ़ियों पर स्थान दिया गया है ,उनके लिए वर्षा और धूप से बचने के लिए अस्थाई पेगोड़ा शैली के तंबू लगाने के लिए जिलाधीश मंडी ने अध्यक्ष के साथ चर्चा की और यह सुझाव दिया कि देवताओं को पूर्ण मान सम्मान देने के लिए हम प्रयासरत है और जो देवता सीढ़ियों पर बैठे है उनको पैगोडा शैली के तंबू इस वर्ष लगाने का आश्वासन दिया । जिस पर कारदारों ने तम्बू लगाने पर सहमति प्रकट की और इसी तरह अन्य देवी-देवताओं को भी सम्मान देने के लिए माननीय मुख्यमंत्री से आग्रह किया है। इस पर समस्त कारदारों ने उपायुक्त का धन्यवाद किया। वहीं सरकार व प्रशासन से कारदारों ने अपनी मांगों द्वारा अनुरोध किया कि देव स्थल जहां जहां है उन्हें पर्यटन का स्वरूप ना दिया जाए ना ही देव स्थल के नजदीक सड़के निकाली जाए तथा विकास कार्य हेतु जो सड़के निकाली जा रही हैं उन्हें कम से कम दो-तीन किलोमीटर दूर ही रखें। जिससे देव स्थलों की गरिमा यथावत बनी रहे।
आमसभा में कारदारों ने यह प्रस्ताव भी रखा कि पंजीकृत देवी-देवताओं को मेले के दौरान अभी तक बैठने का स्थान एवं ठहरने की कोई उचित व्यवस्था उपलब्ध नहीं है, इसलिए आम सभा में सर्व सम्मति से यह निर्णय लिया गया कि कोई भी नया देवता पंजीकृत ना किया जाए,जब तक बैठने और ठहरने की उचित व्यवस्था न हो ।
